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Ahmad Faraz Ki Ghazal Shayari – छोड़ पैमाने वफ़ा

Ahmad Faraz Ki Ghazal Shayari – छोड़ पैमाने वफ़ा

छोड़ पैमाने-वफ़ा* की बात शर्मिंदा न कर दूरियाँ ,मजबूरियाँ, रुस्वाइयाँ*, तन्हाइयाँ कोई क़ातिल ,कोई बिस्मिल,* सिसकियाँ, शहनाइयाँ देख ये हँसता हुआ मौसिम है मौज़ू-ए-नज़र* वक़्त …

Ahmad Faraz Sher O Shayari – मैं तो मकतल

Ahmad Faraz Sher O Shayari – मैं तो मकतल

मैं तो मकतल* में भी किस्मत का सिकंदर निकला कुर्रा-ए-फाल* मेरे नाम का अक्सर निकला था जिन्हें जौम*, वो दरया भी मुझी में डूबे मैं …