Ahmad Faraz Shayari – ये वफ़ा तो



ये वफ़ा तो उन दिनों की बात ही “फ़राज़”
जब लोग सच्चे और मकान कच्चे हुआ करते थे

Ahmad Faraz Shayari – वो बाज़ाहिर तो मिला था

वो बाज़ाहिर तो मिला था एक लम्हे को फ़राज़
उम्र सारी चाहिए उसको भुलाने के लिए


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Ahmad Faraz Sher O Shayari – इस तरह गौर से मत देख

इस तरह गौर से मत देख मेरा हाथ ऐ फ़राज़
इन लकीरों में हसरतों के सिवा कुछ भी नहीं


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Ahmad Faraz Sher O Shayari – तपती रही है

तपती रही है आस की किरणों पे ज़िन्दगी
लम्हे जुदाइयों के मा – ओ साल हो गए

प्यार में एक ही मौसम है बहारों का “फ़राज़”
लोग कैसे मौसमों की तरह बदल जाते है

Ahmad Faraz Famous Shayari – बहुत अजीब है ये बंदिशें

बहुत अजीब है ये बंदिशें मुहब्बत की ‘फ़राज़’
न उसने क़ैद में रखा न हम फरार हुए


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