Ahmad Faraz Sher O Shayari – तू पास भी हो तो दिल

तू पास भी हो तो दिल बेक़रार अपना है
कि हमको तेरा नहीं इन्तज़ार अपना है

मिले कोई भी तेरा ज़िक्र छेड़ देते हैं
कि जैसे सारा जहाँ राज़दार अपना है

वो दूर हो तो बजा तर्के-दोस्ती* का ख़याल
वो सामने हो तो कब इख़्तियार अपना है

ज़माने भर के दुखो को लगा लिया दिल से
इस आसरे पे कि एक ग़मगुसार* अपना है

बला से जाँ का ज़ियाँ* हो, इस एतमाद* की ख़ैर
वफ़ा करे न करे फिर भी यार अपना है

‘फ़राज़’ राहते-जाँ* भी वही है क्या कीजे
वह जिसके हाथ से सीना फ़िगार* अपना है
तर्के-दोस्ती = दोस्ती का त्याग
इख़्तियार = नियंत्रण
ग़मगुसार = हमदर्द
जाँ का ज़ियाँ = जान का नुकसान
एतमाद = भरोसा, विश्वास
राहते-जाँ = सुखदायी
फ़िगार = घायल, ज़ख़्मी