Ahmad Faraz Ki Famous Gazals – बदन में आग सी

बदन में आग सी चेहरा गुलाब जैसा है
के ज़हर-ए-गम का नशा भी शराब जैसा है

कहाँ वो कुर्ब* के अब तो ये हाल है जैसे
तेरे फ़िराक* का आलम भी ख्वाब जैसा है

मगर कभी कोई देखे कोई पढ़े तो सही
दिल आइना है तो चेहरा किताब जैसा है

वो सामने है मगर तिशनगी* नहीं जाती
ये क्या सितम है के दरिया शराब* जैसा है

‘फ़राज़’ संग-ए-मलामत* से ज़ख्म ज़ख्म सही
हमें अज़ीज़ है खाना खराब जैसा

कुर्ब = नज़दीकी
फ़िराक = वियोग, बिछोह
तिशनगी = इच्छा, प्यास
शराब = भ्रम, मृगतृष्णा
संग-ए-मलामत = निंदा