Ahmad Faraz 2 Lines Shayari – नाकाम थीं मेरी सब कोशिशें

नाकाम थीं मेरी सब कोशिशें उस को मनाने की फ़राज़
पता नहीं कहाँ से सीखीं जालिम ने अदाएं रूठ जाने की