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Hindi Shayari, Funny Jokes




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Ahmad Faraz Sher O Shayari – दोस्त बन कर भी

दोस्त बन कर भी नहीं साथ निभानेवाला
वही अन्दाज़ है ज़ालिम का ज़मानेवाला

(जालिम = अत्याचारी )

अब उसे लोग समझते हैं गिरफ़्तार मेरा
सख़्त नादिम है मुझे दाम में लानेवाला

(नादिम = लज्जित : दाम = जाल, बंधन )

सुबह-दम छोड़ गया निक़हते-गुल की सूरत
रात को ग़ुंचा-ए-दिल में सिमट आने वाला

(निक़हते-गुल = गुलाब की ख़ुश्बू की तरह; ग़ुंचा-ए-दिल = दिल की कली)

क्या कहें कितने मरासिम थे हमारे उससे
वो जो इक शख़्स है मुँह फेर के जानेवाला

(मरासिम = मेल-जोल)

तेरे होते हुए आ जाती थी सारी दुनिया
आज तन्हा हूँ तो कोई नहीं आनेवाला

मुंतज़िर किसका हूँ टूटी हुई दहलीज़ पे मैं
कौन आयेगा यहाँ कौन है आनेवाला

(मुंतज़िर = प्रतीक्षारत)

मैंने देखा है बहारों में चमन को जलते
है कोई ख़्वाब की ताबीर बतानेवाला

(बहारों = वसंत ऋतुओं; ताबीर = स्वप्नफल)

क्या ख़बर थी जो मेरी जान में घुला है इतना
है वही मुझ को सर-ए-दार भी लाने वाला

सर-ए-दार = सूली तक

तुम तक़ल्लुफ़ को भी इख़लास समझते हो “फ़राज़”
दोस्त होता नहीं हर हाथ मिलानेवाला

(तक़ल्लुफ़ = औपचारिकता; इख़लास = प्रेम)





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Updated: January 21, 2017 — 4:15 pm

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